भू-स्थानिक डेटा से मजबूत होगा शासन, नई दिल्ली में मंथन
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नई दिल्ली में आयोजित भू-स्थानिक मंच में शासन, शहरी नियोजन और आपदा प्रबंधन में सटीक डेटा के महत्व पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।
नरेंद्र भूषण ने भू-स्थानिक सूचना को आधुनिक प्रशासन का आधार बताते हुए डिजिटल मैपिंग और जीआईएस तकनीक के बढ़ते उपयोग पर जोर दिया।
New Delhi/ नई दिल्ली में “भविष्य के लिए तैयार इको-सिस्टम हेतु भू-स्थानिक आधारों को आगे बढ़ाना” विषय पर आयोजित तकनीकी विशेषज्ञ मंच में भू-स्थानिक सूचना के बढ़ते महत्व पर व्यापक चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में नरेंद्र भूषण ने मुख्य संबोधन देते हुए कहा कि भू-स्थानिक डेटा अब केवल तकनीकी साधन नहीं, बल्कि प्रभावी शासन और विकास का आधार बन चुका है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था कृषि, शहरी नियोजन, पर्यावरण प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और अवसंरचना विकास जैसे क्षेत्रों में सटीक और विश्वसनीय डेटा पर निर्भर करती है। ऐसे में भू-स्थानिक प्रणालियों का उपयोग निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कुशल बना रहा है।
इस मंच का आयोजन नई दिल्ली में किया गया, जिसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र के नीति निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में भारत के सर्वेयर जनरल एस.के. सिन्हा और सिंगापुर भूमि प्राधिकरण के निदेशक डॉ. विक्टर खू सहित कई प्रमुख विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
चर्चा के दौरान संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक भू-स्थानिक सूचना प्रबंधन विशेषज्ञ समिति UN-GGIM द्वारा विकसित विभिन्न ढांचों—जैसे आईजीआईएफ, जीजीआरएफ, जीएसजीएफ और एफईएलए—के महत्व को रेखांकित किया गया। इन ढांचों के माध्यम से देशों को अपने भू-स्थानिक इको-सिस्टम को मजबूत करने और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में मदद मिलती है।
नरेंद्र भूषण ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति एक खुले और नवाचार-आधारित सिस्टम के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) और स्वामित्व योजना जैसी पहलें देश में भूमि प्रबंधन को आधुनिक बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
इन पहलों के तहत ड्रोन, हवाई सर्वेक्षण, डिजिटल मैपिंग और जीआईएस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भूमि अभिलेखों को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जा रहा है।
विशेषज्ञों ने “इंटीग्रेटेड लैंड स्टैक” की अवधारणा पर भी चर्चा की, जो विभिन्न भूमि डेटा सेट्स को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह मंच इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में भू-स्थानिक तकनीक शासन और विकास के हर क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभाएगी।